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मोतियाबिंद का घरेलू इलाज | Motiyabind ka gharelu ilaaj

  • सफेद प्याज अक रस दस ग्राम , शुद्ध शहद दस ग्राम और भीमसेनी कपूर दो ग्राम इन तीनो पदार्थो को भली प्रकार मिलाकर शीशी में भरकर रख ले | यदि कपूर न मिल सके तप प्याज के रस एवं शहद का ही घोल बनाकर शीशी में रख ले और रात को सोने से पहले कांच की सलाई से दोनों आँखों में एक एक बार लगा ले | मोतियाबिंद होना रुक जाता है अथवा हो गया है तो साफ़ हो जाता है |
  • मोतियाबिंद की आरम्भिक अवस्था में शुद्ध शहद की एक एक बूंद प्रतिदिन प्रात:काल आँखों में लगाने से एक माह में ही लाभ प्राप्त होता है | शहद छोटी मक्खियों का या कमल के फुल का हो तो बहुत अच्छा रहता है | ऐसा शहद पतला होता है | शहद में सलाई से प्रयोग करने पर दृष्टिक्षीणता दूर होकर आँखों की ज्योति बढती है और नेत्र संबधी अनेक कष्ट दूर हो जाते है | शहद के कारण नेत्रों में तनाव भी नही हो पाता |
  • नेत्र-ज्योति आजीवन मंद न हो इसके लिए आँखों में शुद्ध मधु प्रतिदिन लगाते रहे | इस प्रयोग से आयु बढने के साथ साथ दृष्टि भी बढती जायेगी | इसके साथ ही बादाम की पांच गिरियाँ रात को पानी में भिगो दे और प्रात:काल पांच काली मिर्च और मिश्री के साथ खूब बारीक पीसकर चाट जाए और उपर से एक गिलास दूध पी ले |
  • अपने ही मूत्र की दो-दो बुँदे आँखों में दो-तीन बार डालने से मोतियाबिंद में लाभ होता है | इस प्रयोग को लगातार दो महीने तक करे और लाभ उठाये |
  • दोनों कोहनियों को घुटनों पर रख ले और घुटनों को आपस में सटा ले या कोहनियों को मेज पर रखे और घुटनों पर तकिया रखकर कोहनियों को उस पर रखे | इसके बाद दोनों हथेलियों को किसी प्याली की भांति गोल करके अपने गाल की हड्डियों पर टिका दे और आँखों को इतना धक ले कि हथेलिया आँखों को छुए नही , आँखों पर कोई दबाव भी न पड़े और न ही वहा से प्रकाश भीतर आ सके ऐसा करने के पश्चात सोचना बंद कर दे , हाथो और आँखों को तनावरहित कर दे और किसी प्रकाशहीन कमरे की भांति कालापन अनुभव करे | इससे आपकी आँखों और मस्तिष्क को आराम मिलेगा | कुछ देर बाद हाथो को हटाकर आँखों को तेजी से खोले और बंद करे | आपको लगेगा कि आपकी आँखों में पहले से अधिक ताजगी आ गयी है | इस प्रकार यह करतल विश्राम दिन में चार-पांच बार दस मिनट के लिए किया जा सकता है इस प्रकार का विश्राम अनावश्यक दबाव से उत्पन्न आँख के रोग एवं मोतियाबिंद पर बहुत लाभदायक है | नेत्रों की थकावट दूर करने के लिए प्रतिदिन कम से कम दस मिनट अवश्य करना चाहिए | इस प्रकार विश्राम करने से काले रंग का अनुभव करने से तथा मन-मस्तिष्क को शांत रखने से स्वास्थ्य में भी वृद्धि होती है |

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